20 हाइकु कविताएँ
खाली पींजरा
हिलती अलगनी
पंछी नभ में !
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सूरज जागा
ठिठुरता हुआ-सा
बिन कम्बल !
ठिठुरता हुआ-सा
बिन कम्बल !
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शीत कपोत
डैने फड़फड़ाये
ऊँघती ऊषा !
डैने फड़फड़ाये
ऊँघती ऊषा !
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तमकी धारा
तमतमाया रवि
सहमा जरा !
तमतमाया रवि
सहमा जरा !
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सूरज तवा
सेंक रही रोटियाँ
गरम हवा !
सेंक रही रोटियाँ
गरम हवा !
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झाँकता जाता
पावस में नीरद
स्त्रोत्र सुनाता !
पावस में नीरद
स्त्रोत्र सुनाता !
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बटुक भौंरा
वेद गुनगुनाये
कली–गली में !
वेद गुनगुनाये
कली–गली में !
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भाँग गुलाल
होली औ धमाल
गूँजे चौपाल !
होली औ धमाल
गूँजे चौपाल !
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गुतला जाता
किरन करों से है
रवि, कली को !
किरन करों से है
रवि, कली को !
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झपकी लेता
तारा, सवेरा उसे
थपकी देता !
तारा, सवेरा उसे
थपकी देता !
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पंक ही मिला
कुमुद–पद्म खिला
कोई न गिला !
कुमुद–पद्म खिला
कोई न गिला !
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गोधूलि बेला
हाँफता लौट चला
अर्क अकेला !
हाँफता लौट चला
अर्क अकेला !
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जेठ ने लिखी
पाती पुरवाई को
आओ मितवा !
पाती पुरवाई को
आओ मितवा !
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लू जब चले
सरकी पगडंडी
रहट तले !
सरकी पगडंडी
रहट तले !
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पुलिन पर
कुल–कुल की ॠचा
गाये समीर !
कुल–कुल की ॠचा
गाये समीर !
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गले मिलते
सफेद काले मेघ
होली खेलते !
सफेद काले मेघ
होली खेलते !
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मन निर्बन्ध
महुए की सुगन्ध
पथिक अंध !
महुए की सुगन्ध
पथिक अंध !
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बैरिन बेरी
कदली–पाती डरी
चीर न डाले !
कदली–पाती डरी
चीर न डाले !
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हिम के संग
हेम भी बदरंग
तुषार दंग !
हेम भी बदरंग
तुषार दंग !
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शीत लहर
बज रही ठठरी
दुबका चाँद !
बज रही ठठरी
दुबका चाँद !
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-डॉ॰ राजेन जयपुरिया

2 Comments:
i like em!!! Are these about me??
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