Friday, June 17, 2005

20 हाइकु कविताएँ


खाली पींजरा
हिलती अलगनी
पंछी नभ में !


***
सूरज जागा
ठिठुरता हुआ-सा
बिन कम्बल !

***
शीत कपोत
डैने फड़फड़ाये
ऊँघती ऊषा !

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तमकी धारा
तमतमाया रवि
सहमा जरा !

***
सूरज तवा
सेंक रही रोटियाँ
गरम हवा !

***
झाँकता जाता
पावस में नीरद
स्त्रोत्र सुनाता !

***
बटुक भौंरा
वेद गुनगुनाये
कली–गली में !

***
भाँग गुलाल
होली औ धमाल
गूँजे चौपाल !

***
गुतला जाता
किरन करों से है
रवि, कली को !

***
झपकी लेता
तारा, सवेरा उसे
थपकी देता !

***
पंक ही मिला
कुमुद–पद्म खिला
कोई न गिला !

***
गोधूलि बेला
हाँफता लौट चला
अर्क अकेला !

***
जेठ ने लिखी
पाती पुरवाई को
आओ मितवा !

***
लू जब चले
सरकी पगडंडी
रहट तले !

***
पुलिन पर
कुल–कुल की ॠचा
गाये समीर !

***
गले मिलते
सफेद काले मेघ
होली खेलते !

***
मन निर्बन्ध
महुए की सुगन्ध
पथिक अंध !

***
बैरिन बेरी
कदली–पाती डरी
चीर न डाले !

***
हिम के संग
हेम भी बदरंग
तुषार दंग !

***
शीत लहर
बज रही ठठरी
दुबका चाँद !

***

-डॉ॰ राजेन जयपुरिया

2 Comments:

At 1:00 PM, Blogger steve said...

i like em!!! Are these about me??

 
At 12:39 PM, Blogger Erik Mann said...

great post, i'll come visit again soon...erik

 

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