Friday, June 17, 2005

17 हाइकु कविताएँ

दोहरी हुई

लाज से, पवन को

छूकर लता !

***


देखो तनिक

बसन्त है धनिक

बाँटे कलियाँ !
***


छटपटाते

सुधि के स्वर, कहाँ

लौट वे पाते ?
***


हवाएँ ठंडी
हैं बड़ी ही घमंडी
इतरा रही !

***
भावों से भरे
हृदय को रुचती
अगायी गीति !

***
भूखा रहके
औरों को खिला देना
यही संस्कृति !

***
दाँयें या वाँयें
चौक पर दिशायें
हाथ हिलायें !

***
अबोले बैन
बरस पड़ें नैन
सुन लो गर !

***
कब मिलेंगे
अवनि औ अम्बर?
अबोली प्रीति !

***
तुम न आये
सदा निकट रही
तुम्हारी स्मृति !

***
व्योम छतरी
बचा नहीं पाये क्यों
भीगे धरती ?

***
एकान्त भूत
दबोचे, कातें तब
सुधियाँ सूत !

***
गुदगुदातीं
चीटियाँ भी पेड़ को
जब चढ़तीं !

***
मौन को तोड़ें
लहरों के मंजीरे
नदिया तीरे !

***
बोले खंजन
करो नव श्रृंगार
आँजों अंजन !

***
हँसता फूल
रोये मन ही मन
होना है धूल !

***
मन पपीहा
टेरता अहर्निश
सुने ना पिया !
***

-डॉ॰ राजेन जयपुरिया

1 Comments:

At 7:05 AM, Anonymous Anonymous said...

Dr.jaipuriya ji Aapke haiku bakayi bahut sunder hain. net per hindi haiku dekhker kitani khushi ho rahi hai ise kah pana mushkil hai. Hindi apne vatan ki khushbu...... versha per aapka haiku mujhe sabse achcha laga. puri verasha ka chitr hi khinch ker rakh diya aapne wah bhi 17 aksher main. bahut khub. meri samajh se Haiku main prakriti ka rahana anivarya hai.
Rohit kamal, Japan

 

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