17 हाइकु कविताएँ
दोहरी हुई
लाज से, पवन को
छूकर लता !
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देखो तनिक
बसन्त है धनिक
बाँटे कलियाँ !
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छटपटाते
सुधि के स्वर, कहाँ
लौट वे पाते ?
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हवाएँ ठंडी
हैं बड़ी ही घमंडी
इतरा रही !
हैं बड़ी ही घमंडी
इतरा रही !
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भावों से भरे
हृदय को रुचती
अगायी गीति !
हृदय को रुचती
अगायी गीति !
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भूखा रहके
औरों को खिला देना
यही संस्कृति !
औरों को खिला देना
यही संस्कृति !
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दाँयें या वाँयें
चौक पर दिशायें
हाथ हिलायें !
चौक पर दिशायें
हाथ हिलायें !
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अबोले बैन
बरस पड़ें नैन
सुन लो गर !
बरस पड़ें नैन
सुन लो गर !
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कब मिलेंगे
अवनि औ अम्बर?
अबोली प्रीति !
अवनि औ अम्बर?
अबोली प्रीति !
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तुम न आये
सदा निकट रही
तुम्हारी स्मृति !
सदा निकट रही
तुम्हारी स्मृति !
***
व्योम छतरी
बचा नहीं पाये क्यों
भीगे धरती ?
बचा नहीं पाये क्यों
भीगे धरती ?
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एकान्त भूत
दबोचे, कातें तब
सुधियाँ सूत !
दबोचे, कातें तब
सुधियाँ सूत !
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गुदगुदातीं
चीटियाँ भी पेड़ को
जब चढ़तीं !
जब चढ़तीं !
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मौन को तोड़ें
लहरों के मंजीरे
नदिया तीरे !
लहरों के मंजीरे
नदिया तीरे !
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बोले खंजन
करो नव श्रृंगार
आँजों अंजन !
करो नव श्रृंगार
आँजों अंजन !
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हँसता फूल
रोये मन ही मन
होना है धूल !
रोये मन ही मन
होना है धूल !
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मन पपीहा
टेरता अहर्निश
सुने ना पिया !
टेरता अहर्निश
सुने ना पिया !
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-डॉ॰ राजेन जयपुरिया

1 Comments:
Dr.jaipuriya ji Aapke haiku bakayi bahut sunder hain. net per hindi haiku dekhker kitani khushi ho rahi hai ise kah pana mushkil hai. Hindi apne vatan ki khushbu...... versha per aapka haiku mujhe sabse achcha laga. puri verasha ka chitr hi khinch ker rakh diya aapne wah bhi 17 aksher main. bahut khub. meri samajh se Haiku main prakriti ka rahana anivarya hai.
Rohit kamal, Japan
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